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सेमीकंडक्टर मिशन से बढ़ा भारत का आत्मविश्वास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन के दौरान कहा कि ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ देश के आत्मविश्वास का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने बताया कि यह पहल केवल एक औद्योगिक योजना नहीं बल्कि भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 2021 में शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य देश में चिप निर्माण को बढ़ावा देना और वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी को मजबूत करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज दुनिया डिजिटल युग में तेजी से आगे बढ़ रही है और सेमीकंडक्टर इस विकास का आधार बन चुके हैं। ऐसे में भारत का इस क्षेत्र में कदम रखना देश के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।
गुजरात बना सेमीकंडक्टर निर्माण का नया केंद्र
गुजरात के साणंद में स्थापित यह प्लांट भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। करीब 3300 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। यह प्लांट न केवल देश की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी भारत की मौजूदगी को मजबूत करेगा। साणंद पहले से ही औद्योगिक गतिविधियों के लिए जाना जाता है और अब सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी यह एक प्रमुख हब के रूप में उभर रहा है।
वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि सेमीकंडक्टर उत्पादन में भारत की भागीदारी से वैश्विक सप्लाई चेन को नया संतुलन मिलेगा। उन्होंने बताया कि दुनिया भर की इंडस्ट्रीज को बिजली और डिजिटल उपकरणों के लिए चिप्स की जरूरत होती है, और भारत इस मांग को पूरा करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे
इस परियोजना से देश के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर उद्योग में उच्च तकनीकी कौशल की जरूरत होती है, जिससे इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र के छात्रों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवा इस क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकते हैं और देश को वैश्विक स्तर पर आगे ले जा सकते हैं।
आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम
सेमीकंडक्टर मिशन को ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश को तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि हम अपने संसाधनों और क्षमताओं का पूरा उपयोग करें। इस मिशन के जरिए भारत विदेशी निर्भरता को कम कर सकता है और अपनी जरूरतों को खुद पूरा कर सकता है।
तकनीकी क्षेत्र में भारत की नई पहचान बनेगी
इस पहल से भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर एक नई पहचान मिलने की उम्मीद है। सेमीकंडक्टर उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बाद भारत न केवल अपनी जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि अन्य देशों को भी निर्यात कर सकेगा। इससे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भारत एक प्रमुख तकनीकी शक्ति के रूप में उभरेगा।
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