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किसान परिवार से निकलकर रचा इतिहास
राजस्थान बोर्ड की 10वीं परीक्षा के परिणाम ने इस बार एक ऐसी कहानी सामने रखी है, जो संघर्ष, मेहनत और संकल्प की मिसाल बन गई है। झुंझुनूं जिले की रहने वाली छात्रा प्रियांशी सुंडा ने 600 में से 599 अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है। खास बात यह है कि प्रियांशी एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जहां संसाधनों की सीमाएं होने के बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत से असाधारण सफलता प्राप्त की। उनके इस प्रदर्शन ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे गांव और जिले का नाम रोशन कर दिया है। जैसे ही परिणाम घोषित हुए, प्रियांशी के घर बधाई देने वालों का तांता लग गया। हर कोई उनकी सफलता की सराहना कर रहा है और उन्हें आने वाले समय के लिए शुभकामनाएं दे रहा है। यह उपलब्धि उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं।
लगातार मेहनत और अनुशासन बना सफलता का आधार
प्रियांशी सुंडा ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी नियमित पढ़ाई और अनुशासन को दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने हर विषय को समझने पर विशेष ध्यान दिया और केवल रटने के बजाय कॉन्सेप्ट को गहराई से पढ़ा। उन्होंने अपनी दिनचर्या इस तरह बनाई थी कि हर विषय को पर्याप्त समय मिल सके। परीक्षा के दौरान उन्होंने समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया, जिससे वे हर प्रश्न को सही तरीके से हल कर सकीं। प्रियांशी बताती हैं कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान मोबाइल और टीवी से दूरी बनाए रखी, ताकि उनका पूरा फोकस केवल पढ़ाई पर रहे। उनकी यह रणनीति ही उनकी सफलता का मुख्य कारण बनी।
अंग्रेजी को छोड़ बाकी सभी विषयों में पूरे अंक
प्रियांशी के शानदार प्रदर्शन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अंग्रेजी विषय को छोड़कर बाकी सभी विषयों में पूर्ण अंक हासिल किए। यह उपलब्धि न केवल उनकी मेहनत को दर्शाती है, बल्कि उनकी विषयों पर मजबूत पकड़ को भी साबित करती है। इतनी उच्च अंक प्राप्त करना किसी भी छात्र के लिए आसान नहीं होता, लेकिन प्रियांशी ने इसे संभव कर दिखाया। उनके शिक्षक भी इस सफलता से बेहद खुश हैं और उनका कहना है कि प्रियांशी शुरू से ही पढ़ाई में तेज और अनुशासित छात्रा रही हैं।
परिवार और शिक्षकों का मिला पूरा सहयोग
प्रियांशी ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता और शिक्षकों को दिया है। उनके पिता, जो एक किसान हैं, ने हमेशा उन्हें पढ़ाई के लिए प्रेरित किया और हर संभव सहयोग दिया। वहीं, स्कूल के शिक्षकों ने भी उन्हें सही मार्गदर्शन दिया और उनकी पढ़ाई में हर तरह से मदद की। स्कूल प्रबंधन का कहना है कि प्रियांशी जैसी छात्राएं संस्थान के लिए गर्व का विषय होती हैं। उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ अनुशासन और मेहनत का जो उदाहरण पेश किया है, वह अन्य छात्रों के लिए प्रेरणादायक है।
सपनों को साकार करने की दिशा में बढ़ते कदम
प्रियांशी सुंडा अब आगे की पढ़ाई को लेकर भी काफी उत्साहित हैं। उनका सपना है कि वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने क्षेत्र में कुछ बड़ा करें और अपने परिवार का नाम रोशन करें। उन्होंने बताया कि वे आगे भी इसी तरह मेहनत करती रहेंगी और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए पूरी लगन से प्रयास करेंगी। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।
छात्रों के लिए प्रेरणा बनी प्रियांशी की कहानी
प्रियांशी की यह सफलता केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रों के लिए यह संदेश है कि संसाधनों की कमी कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकती। अगर मेहनत और लगन हो, तो हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनकी कहानी उन सभी छात्रों को प्रेरित करती है, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सफलता शिक्षा के महत्व को भी दर्शाती है और यह बताती है कि सही दिशा में की गई मेहनत हमेशा रंग लाती है।
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