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गंगा की पवित्रता पर संतों की चिंता बढ़ी
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने गंगा नदी की स्वच्छता को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है और इसे केवल धार्मिक नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी बताया है। उन्होंने कहा कि गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि भारत की आस्था, संस्कृति और जीवनधारा का प्रतीक है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह से गंगा का प्रदूषण बढ़ा है, वह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर एक दिन गंगा आरती न भी हो तो कोई बड़ी बात नहीं, लेकिन गंगा को प्रदूषित करना एक गंभीर अपराध है। उनके इस बयान ने गंगा संरक्षण को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्वामी जी ने यह भी कहा कि धार्मिक आयोजनों के दौरान अक्सर लोग स्वच्छता को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे नदी का स्वरूप प्रभावित होता है।
युवाओं की भागीदारी को बताया सकारात्मक संकेत
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने हाल के धार्मिक आयोजनों में युवाओं की बढ़ती भागीदारी को एक सकारात्मक संकेत बताया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी धर्म और अध्यात्म की ओर तेजी से आकर्षित हो रही है, जो समाज के लिए अच्छा संकेत है। खासकर गंगा स्नान जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि नई पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना चाहती है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं को सिर्फ धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। अगर युवा वर्ग गंगा की सफाई और संरक्षण के लिए आगे आएगा, तो इसका असर दूरगामी होगा।
धार्मिक आस्था के साथ स्वच्छता भी जरूरी
उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म और आस्था का मतलब केवल पूजा-पाठ या अनुष्ठान नहीं है, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा भी इसका अहम हिस्सा है। गंगा आरती, स्नान और अन्य धार्मिक क्रियाएं तभी सार्थक हैं, जब उनके साथ स्वच्छता का ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि अगर हम गंगा को ही गंदा कर देंगे, तो हमारी आस्था का कोई मतलब नहीं रह जाएगा। इसलिए हर श्रद्धालु का यह कर्तव्य है कि वह गंगा में कचरा न डाले और दूसरों को भी इसके लिए जागरूक करे।
सरकार और समाज की साझा जिम्मेदारी बनी
स्वामी जी ने गंगा संरक्षण को केवल सरकार की जिम्मेदारी मानने से इनकार किया और कहा कि इसमें समाज की भी बराबर भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार कई योजनाएं चला रही है, लेकिन जब तक आम लोग इसमें सहयोग नहीं करेंगे, तब तक कोई भी योजना सफल नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक संस्थाओं को भी आगे आकर स्वच्छता अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
धार्मिक आयोजनों में बढ़ती भीड़ बनी चुनौती
हाल के वर्षों में धार्मिक आयोजनों में बढ़ती भीड़ भी गंगा प्रदूषण का एक बड़ा कारण बन रही है। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा तट पर आते हैं, लेकिन स्वच्छता के नियमों का पालन नहीं करते। इससे नदी में कचरा और गंदगी बढ़ जाती है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक है। उन्होंने सुझाव दिया कि आयोजनों के दौरान बेहतर प्रबंधन और जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि इस समस्या को कम किया जा सके।
गंगा संरक्षण को बनाया जाए जन आंदोलन
अंत में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने गंगा संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक हर व्यक्ति इसे अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा, तब तक गंगा को स्वच्छ रखना संभव नहीं है। उन्होंने सभी से अपील की कि वे गंगा की सफाई के लिए आगे आएं और इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें। उनके इस संदेश ने यह स्पष्ट कर दिया कि गंगा की रक्षा केवल सरकार या संतों का काम नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
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