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IRGC ताकत के आगे सिस्टम कमजोर
ईरान में IRGC की ताकत के सामने सीमित हुआ राष्ट्रपति का अधिकार, कड़े नियमों और वैचारिक चयन से बनती है यह फोर्स
01 Apr 2026, 02:27 PM -
Reporter : Mahesh Sharma

ईरान में दो सेनाओं का अनोखा ढांचा

ईरान की सैन्य व्यवस्था दुनिया के अन्य देशों से काफी अलग है। यहां दो प्रमुख सैन्य बल काम करते हैं—एक पारंपरिक सेना और दूसरी Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC)। जहां पारंपरिक सेना बाहरी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है, वहीं IRGC का मुख्य काम इस्लामिक क्रांति की रक्षा करना और आंतरिक सुरक्षा बनाए रखना है। IRGC का प्रभाव केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीति, अर्थव्यवस्था और प्रशासन तक फैला हुआ है। यही कारण है कि यह संगठन देश की सत्ता संरचना में बेहद मजबूत स्थिति रखता है और कई बार सरकार के फैसलों पर भी इसका असर देखने को मिलता है।


राष्ट्रपति की सीमित भूमिका पर उठे सवाल

हाल ही में Masoud Pezeshkian के कार्यकाल में यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया है कि राष्ट्रपति के अधिकार कितने सीमित हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ मामलों में वे अपने कैबिनेट के सदस्यों की नियुक्ति में भी पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हैं। इसका कारण यह है कि IRGC और अन्य शक्तिशाली संस्थानों का राजनीतिक निर्णयों पर गहरा प्रभाव होता है। इससे यह साफ होता है कि ईरान में सत्ता केवल निर्वाचित सरकार के हाथ में नहीं होती, बल्कि कई अन्य शक्तिशाली संस्थाएं भी निर्णय प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती हैं।


IRGC में भर्ती का कड़ा और वैचारिक प्रोसेस

IRGC में भर्ती होना आसान नहीं है। यहां केवल शारीरिक क्षमता ही नहीं, बल्कि वैचारिक निष्ठा भी सबसे बड़ा मापदंड होती है। उम्मीदवारों को इस्लामिक क्रांति और देश के सर्वोच्च नेतृत्व के प्रति पूरी वफादारी दिखानी होती है। भर्ती प्रक्रिया में बैकग्राउंड चेक, धार्मिक विचारधारा की जांच और मानसिक परीक्षण शामिल होते हैं। इसके अलावा, Basij जैसे नेटवर्क के जरिए युवाओं को पहले तैयार किया जाता है और फिर उन्हें IRGC में शामिल किया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि संगठन में केवल वही लोग शामिल हों जो उसकी विचारधारा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हों।


राजनीति और अर्थव्यवस्था में गहरी पकड़

IRGC केवल एक सैन्य संगठन नहीं है, बल्कि यह ईरान की अर्थव्यवस्था और राजनीति में भी गहरी पकड़ रखता है। कई बड़े उद्योग, निर्माण परियोजनाएं और व्यापारिक गतिविधियां इस संगठन से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा, चुनावी प्रक्रिया और राजनीतिक फैसलों में भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव देखा जाता है। यही वजह है कि IRGC को ईरान के सबसे शक्तिशाली संस्थानों में गिना जाता है। इसकी ताकत इतनी ज्यादा है कि यह सरकार के कई फैसलों को प्रभावित कर सकता है और अपनी रणनीति के अनुसार दिशा तय कर सकता है।


सुरक्षा और रणनीतिक भूमिका में अहम योगदान

देश की सुरक्षा में IRGC की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यह संगठन न केवल आंतरिक सुरक्षा संभालता है, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहता है। मिडिल ईस्ट में कई रणनीतिक गतिविधियों में इसकी भागीदारी देखी जाती है। इसके विशेष बल और खुफिया नेटवर्क देश को बाहरी और आंतरिक खतरों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। यही कारण है कि सरकार भी इस संगठन को कमजोर करने की बजाय उसके साथ तालमेल बनाकर चलती है।


भविष्य में सत्ता संतुलन बना रहेगा चुनौती

ईरान में सत्ता का संतुलन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक तरफ निर्वाचित सरकार है, तो दूसरी तरफ IRGC जैसे शक्तिशाली संस्थान हैं, जिनका प्रभाव लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि राष्ट्रपति और अन्य राजनीतिक संस्थाएं इस संतुलन को कैसे बनाए रखती हैं। अगर संतुलन बिगड़ता है, तो इसका असर देश की राजनीति और नीतियों पर पड़ सकता है। ऐसे में ईरान के लिए यह जरूरी होगा कि वह अपनी संस्थागत संरचना को संतुलित रखते हुए आगे बढ़े।

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