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अनिवार्य सैन्य सेवा का सख्त नियम
ईरान में सैन्य सेवा केवल एक करियर विकल्प नहीं बल्कि एक कानूनी जिम्मेदारी है। देश के अधिकांश पुरुषों के लिए सेना में शामिल होना अनिवार्य होता है। यह व्यवस्था वहां के कड़े “Conscription Law” के तहत लागू की गई है, जिसके अनुसार एक निश्चित उम्र के बाद युवाओं को सैन्य सेवा देनी ही होती है। आमतौर पर यह सेवा 18 वर्ष की आयु के बाद शुरू होती है और लगभग 18 से 24 महीनों तक चलती है। इस दौरान युवाओं को विभिन्न सैन्य प्रशिक्षण दिए जाते हैं, जिनमें शारीरिक फिटनेस, हथियार संचालन, रणनीतिक प्रशिक्षण और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटना शामिल होता है। सरकार का मानना है कि इससे देश की सुरक्षा मजबूत होती है और युवाओं में अनुशासन तथा देशभक्ति की भावना विकसित होती है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट भी दी जाती है, जैसे स्वास्थ्य समस्याएं या उच्च शिक्षा।
स्वैच्छिक भर्ती का अलग तंत्र मौजूद
अनिवार्य सेवा के अलावा ईरान में एक और महत्वपूर्ण सैन्य संगठन है जिसे Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) कहा जाता है। इसमें भर्ती पूरी तरह से स्वैच्छिक होती है, लेकिन यहां चयन प्रक्रिया काफी सख्त और वैचारिक आधार पर होती है। इस संगठन में वही लोग शामिल हो सकते हैं जो इस्लामिक गणराज्य की विचारधारा के प्रति पूरी तरह निष्ठावान हों। उम्मीदवारों का मानसिक, धार्मिक और राजनीतिक दृष्टिकोण भी परखा जाता है। IRGC को ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाइयों में गिना जाता है और इसका मुख्य काम देश की आंतरिक सुरक्षा और क्रांति की रक्षा करना है। इसमें शामिल होने वाले युवाओं को विशेष प्रशिक्षण और सुविधाएं भी दी जाती हैं, जिससे यह संगठन और अधिक प्रभावशाली बनता है।
प्रशिक्षण और चयन प्रक्रिया का विस्तृत ढांचा
ईरान में सेना में भर्ती के बाद युवाओं को कठिन प्रशिक्षण से गुजरना पड़ता है। शुरुआत में बेसिक ट्रेनिंग दी जाती है, जिसमें अनुशासन, शारीरिक क्षमता और मानसिक मजबूती पर जोर होता है। इसके बाद सैनिकों को उनकी योग्यता और जरूरत के अनुसार अलग-अलग यूनिट्स में भेजा जाता है। कुछ को बॉर्डर सुरक्षा में लगाया जाता है तो कुछ को तकनीकी और लॉजिस्टिक्स जैसे विभागों में काम मिलता है। चयन प्रक्रिया में मेडिकल टेस्ट, बैकग्राउंड चेक और फिजिकल फिटनेस टेस्ट शामिल होते हैं। सेना का उद्देश्य केवल युद्ध के लिए तैयार करना नहीं बल्कि युवाओं को हर परिस्थिति के लिए सक्षम बनाना होता है। यही कारण है कि प्रशिक्षण के दौरान सख्ती और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।
शहीद सैनिकों के परिवार को आर्थिक सहायता
अगर कोई सैनिक देश की रक्षा करते हुए शहीद हो जाता है, तो उसके परिवार को सरकार की ओर से कई प्रकार की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसमें एकमुश्त मुआवजा, मासिक पेंशन और अन्य वित्तीय लाभ शामिल होते हैं। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि शहीद के परिवार को किसी भी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा, परिवार के सदस्यों को टैक्स में छूट और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है। यह व्यवस्था सैनिकों का मनोबल बढ़ाने और उनके परिवारों को सुरक्षा देने के उद्देश्य से बनाई गई है।
शिक्षा और नौकरी में विशेष प्राथमिकता
शहीद सैनिकों के परिवार के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में विशेष प्राथमिकता दी जाती है। उन्हें अच्छे स्कूलों और विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आरक्षण और स्कॉलरशिप दी जाती है। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में भी उन्हें प्राथमिकता मिलती है। कई मामलों में परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का प्रावधान भी होता है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि शहीद के परिवार का भविष्य सुरक्षित रहे और उन्हें सम्मानजनक जीवन मिल सके। यह नीति देश में देशभक्ति और बलिदान की भावना को मजबूत करती है।
सम्मान और सामाजिक प्रतिष्ठा का विशेष स्थान
ईरान में शहीद सैनिकों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं बल्कि सामाजिक सम्मान भी दिया जाता है। उनके नाम पर स्मारक बनाए जाते हैं, सड़कों और संस्थानों का नामकरण किया जाता है। राष्ट्रीय कार्यक्रमों में उनके परिवारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है। समाज में उन्हें अत्यधिक सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। सरकार और आम जनता दोनों ही शहीदों के योगदान को याद रखते हैं और उन्हें देश का हीरो मानते हैं। यही कारण है कि सेना में सेवा करना वहां केवल नौकरी नहीं बल्कि एक सम्मान और गर्व की बात मानी जाती है।
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