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ATF कीमतों में ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज
नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही हवाई ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखने को मिली है। पहली बार ATF की कीमत 2 लाख रुपये प्रति किलोलीटर के स्तर को पार कर गई है, जिसने एविएशन सेक्टर को झटका दे दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बढ़ोतरी हाल के वर्षों में सबसे बड़ी उछाल में से एक मानी जा रही है। इस अचानक बढ़ोतरी ने एयरलाइंस कंपनियों की लागत संरचना को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। आमतौर पर ATF की कीमतों में इतना बड़ा बदलाव बहुत कम समय में देखने को नहीं मिलता, लेकिन इस बार वैश्विक हालात ने इसे संभव बना दिया है।
होर्मुज तनाव से बढ़ा तेल संकट गहराया
इस भारी बढ़ोतरी के पीछे सबसे बड़ा कारण मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव और Strait of Hormuz के आसपास की स्थिति है। यह क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट्स में से एक है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के चलते यहां तेल की सप्लाई पर असर पड़ा है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है, जिसका सीधा असर ATF पर भी पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक यह तनाव बना रहेगा, तब तक तेल की कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल है।
एयरलाइंस कंपनियों की लागत में भारी उछाल
ATF की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर एयरलाइंस कंपनियों पर पड़ रहा है। किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा ईंधन पर ही खर्च होता है। ऐसे में जब ईंधन की कीमतें दोगुनी हो जाती हैं, तो कंपनियों के लिए लागत को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई एयरलाइंस अब अपने खर्च को कम करने के लिए नई रणनीतियां बनाने पर मजबूर हैं, जिसमें फ्लाइट्स की संख्या घटाना या किराया बढ़ाना शामिल हो सकता है।
हवाई टिकट की कीमतों में बढ़ोतरी तय
ATF महंगा होने का सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है। जब एयरलाइंस की लागत बढ़ती है, तो वह इसे टिकट की कीमतों में शामिल कर देती हैं। ऐसे में आने वाले समय में हवाई सफर महंगा होना तय माना जा रहा है। खासकर घरेलू यात्राओं में किराए में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इससे आम यात्रियों के लिए हवाई यात्रा करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है और कई लोग वैकल्पिक साधनों की ओर रुख कर सकते हैं।
सरकार ने बताया वैश्विक कारण जिम्मेदार
इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से भी बयान सामने आया है। Ministry of Petroleum and Natural Gas ने साफ किया है कि ATF की कीमतों में बढ़ोतरी पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर है और इसमें घरेलू स्तर पर ज्यादा हस्तक्षेप संभव नहीं है। सरकार ने यह भी कहा है कि वह स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर राहत देने के उपायों पर विचार किया जा सकता है।
आगे और बढ़ सकती हैं कीमतें
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है, तो ATF की कीमतों में और उछाल देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, वैश्विक सप्लाई चेन में किसी भी तरह की बाधा कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है। ऐसे में एविएशन सेक्टर और यात्रियों दोनों को आने वाले समय में और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर टिकी हैं, जो आगे की दिशा तय करेंगे।
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